रुक जा रहा सास लेने को लम्हा…
यूं ख्वाहिशोको बुनता जाएगा कितना,
रुक जा रहा बांध लेने को लम्हा…
यूं भागेगा कब तक दुसरोको पिछे,
रुक जा रहा अपना जिने को लम्हा…
यूं जिंदा होके भी मुर्दे सा तू क्यूँ है,
रुक जा रहा जागने को ये लम्हा…
यूँ सोचता सब के बारे मे क्यूँ है,
रुक जा रहा खुद को देने ये लम्हा…
– सौरभ
Tag: lamha
-
यूं बेसब्री को लिये तू चल रहा है कितना,